in news prikaram मेरठ, बागपत, रूडकी व सहारनपुर में हुए तब्लीगी इज्तमों में पहुंची लाखों की अपार भीड को देखकर पता चलता है कि इस्लाम धर्म कितना अनुशासित, एकता अखंडता व ऊंच नीच के भेदभाव को खत्म करने का पक्षधर है क्योंकि अल्लाह की वहदानियत के नाम पर पहुंची लाखों की भीड में क्या अमीर, क्या गरीब सबके सब एक ही सफ में बैठे नजर आये। बिना प्रशासन की मदद के भीड को संभालना मुश्किल होता है, लेकिन इन इज्तमों में बिना प्रशासन की मदद के बडे ही अनुशासित तरीके से तीन दिवसीय इज्तमों का आयोजन किया जाता है। तब्लीगी जमात एक ऐसी जमात जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने तथा अल्लाह व उसके रसूल (स.अ.व.) की बताई शिक्षाओें पर अमल कराने के लिए वजूद में आई थी। आज भी अपने कर्तव्यों का निर्वाहन उसी शिद्दत से कर रही है जिस मकसद के साथ इस जमात का गठन किया गया था। बताते चले कि हिन्दुस्तान में एक ऐसा दौर भी आया जब मुसलमान अपनी दीनी तालीमात से बेजार हो गये थे। जो सिर्फ नाम के मुसलमान रह गये थे। इसी दौर में मौलाना मौ. इलियास (रह.) ने मुसलमानों के इन हालात को देखकर उन तक अल्लाह की वहदानियत व हजरत मुहम्मद (स.अ.व...